Wednesday, 14 August 2013

Independence Day 15 August Speech Poem and Thoughts

आज का दिन भारत के इतिहास का स्वर्णिम दिन है!
ये मेरा सौभाग्य है की मैने एक स्वतन्त्र भारत में जन्म लिया है ! लेकिन मुझे दुःख है आज  हम अपनी आज़ादी की कीमत को नज़रंदाज़ कर रहे है!
 (इसी पर मै एक छोटी सी कविता आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हु, जिसका शीर्षक है :आओ मिलकर सपथ ये ले )


कविता का शीर्षक : आओ मिलकर सपथ ये ले

भारत माता रो कर कहती  - आज़ादी अभी अधूरी है। (पन्द्रह अगस्त...)
सपने होने हैं सच बाक़ी, साक्षरता अभी न पूरी है॥
 
आओ मिलकर सपथ ये ले, स्वस्थ और, शिक्षित भारत पाना है !

अपने स्वर्णिम, इस भारत से, अज्ञान को पूर्ण मिटाना है!! (अज्ञान को ...)२


जिनकी लाशों पर पग धर कर, आजाद  तिरंगा पाया है! (जिनकी लाशों)
उनकी रक्त की बूंदो को, हमने पानी समझ बहाया है !!
आओ मिलकर सपथ ये ले, उनका का भी मान बढ़ायेगे !
जो काम न आये मिटटी के,  उस मिटटी, का न खायेगे !! (उस मिटटी का ...)२


नेता हम जिनको कहते , कुछ उनमे भ्रस्टाचारी है! (नेता हम ....)
जो तन पे खादी है पहने, और जेब में गाँधी भारी है!!
आओ मिलकर सपथ ये ले, मत का अधिकार दिखाएगे!
जो लोक पाल, नहीं लाये तो,  लोकसभा भी नहीं बुलायेगे !! (लोकसभा भी )२

सभ्यता जहाँ कुचली जाती, ममता का मान नहीं होता !! (सभ्यता जहाँ..)
काली- दुर्गा पूजी जाती, पर कन्या भ्रूण नहीं खिलता!
आओ मिलकर सपथ ये ले, हर बेटी को, जन्म दिलायेगे!
गर किसी ने किया दुस्शाहस, उसको, कारावास दिखायेगे!! (कारावास.)

इंसान जहा बेचा जाता, ईमान ख़रीदा जाता है। (इंसान जहा....)
सैनिक की विधवा रोती है, उस पार कोई मुस्काता है॥ 
आओ मिलकर सपथ ये ले, अब और न धोका खायेगे !
गर पार करी सीमा रावण ने, उसकी, लंका वही जालायेगे !! (लंका..)

बस इसीलिए तो कहता हूँ, आज़ादी अभी अधूरी है। 
कैसे उल्लास मनाऊँ मैं?, जब फैली धर्म की दुरी है ॥ 
आओ मिलकर सपथ ये ले, तिरंगे का मान बढायेगे !
आशीष रहे, भारत माँ का, भारत को अखंड बनाएँगे।!! (भारत)
जय हिन्द, जय भारत ...! 


हम सभी ब्रिटश शासन में हुए अत्याचारों से परिचित है, आज़ादी पाने के लिए भारत के हर राज्य ने, समाज के हर तपके और हर धर्म के लोगो ने अपने प्राणों की आहुति दी थी ! हम तो केवल कुछ चंद  स्वतंत्र सेनानियों और शहीदों को जानते है, लेकिन इनकी सूची बहुत लम्बी है!

लेकिन आज बहुत से ऐसे कारण है, जिनको देख के हमें खुद से पूछना पड़ता है की, क्या हम स्वत्रन्त्र है?